क्या नहीं सोचा था
नेहरु और जिन्ना नेकि ये कीमत चुकानी होगी
आज़ादी और विभाजन की,
नालियों में बह रहा
बेकसूरों का रक्त था
और वो बेकसूर नहीं जानते थे
कि सरहद किसे कहते हैं
और आज़ादी क्या है,
वो नहीं जानते थे
नेहरु और जिन्ना को,
वो तो मार दिए गए
हिन्दू और मुसलमान होने के
अपराध में,
मरने से पहले देखे थे उन्होंने
अपनी औरतों के स्तन कटते हुए
अपने जिंदा बच्चों को
गोस्त कि तरह आग में पकते हुए,
दुधमुहे बच्चेअपनी मरी हुई माँ की
कटी हुई छातियों से बहते रक्त को
सहमे हुए देख रहे थे
और उसकी बाहों को
इस उम्मीद में खींच रहे थे
कि बस अब वो उसे गोद में उठा लेगी,
माएँ अपनी जवान बेटियों के
गले घोट रही थी उन्हें बलात्कार से बचाने के लिए,
बेरहमी कि हदों को तोड़कर
इंसानियत को रौंदा गया,
पर एक सवाल आज भी
अपनी जगह कायम है
कि इस भीषण त्रासदी का
ज़िम्मेदार कौन???
जिन्ना को
उनका पाकिस्तान मिला
नेहरु को
हिन्दुस्तान,
परन्तु बाकी बचे
चालीस करोड़ लोगों को
क्या मिला???
टुकड़ों में बंटा
लहुलुहान हिन्दुस्तान!!!